8 जून 2019 - 09:58
कोई भी नया विषय परमाणु समझौते को सुरक्षित रखने में सहायक सिद्ध नहीं होगाः मूसवी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि जेसीपीओए से इतर कोई अन्य विषय, परमाणु समझौते को सुरक्षित रखने में सहायक सिद्ध नहीं होगा।

(ABNA24.com)विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि जेसीपीओए से इतर कोई अन्य विषय, परमाणु समझौते को सुरक्षित रखने में सहायक सिद्ध नहीं होगा।

परमाणु समझौते के संबन्ध में अमरीका और फ़्रांस के राष्ट्रपतियों के समान दृष्टिकोण पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसवी ने स्पष्ट किया है कि जेसीपीओए से इतर कोई भी मुद्दा, न केवल यह कि परमाणु समझौते को सुरक्षित रखने में सहायक सिद्ध नहीं होगा बल्कि इससे संबन्धित पक्षों के बीच अविश्वास का कारण बनेगा।  अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प और फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रां ने फ़्रांस में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में नई वार्ता आरंभ की जाए।  अमरीका और फ़्रांस के इस संयुक्त दृष्टिकोण को पहले भी पेश किया जा चुका है, यहां तक कि परमाणु वार्ता के दौरान फ़्रांस ने काफ़ी नकारात्मक भूमिका निभाई जिसके कारण परमाणु वार्ता की अवधि बहुत बढ़ गई थी।  जेसीपीओए या परमाणु समझौते में केवल ईरान का शांतिपूर्ण परमाणु मामला ही शामिल है।  इसके माध्यम से ईरान ने यह सिद्ध करने की कोशिश की है कि वह परमाणु बम बनाने का इच्छुक नहीं है।  ट्रम्प के सत्ता संभालने के बाद अमरीका, एकपक्षीय रूप से उस समझौते से निकल गया जिसपर ईरान तथा विश्व की छह शक्तियों के बीच लंबी वार्ता के बात आम सहमति बनी थी।  ट्रम्प के एकपक्षीय रूप से परमाणु समझौते से निकल जाने के एक वर्ष के बाद तक यूरोपीय पक्ष, जेसीपीओए के संबन्ध में अपने वचन पूरा करने में अक्षम रहा है।  वर्तमान स्थिति में फ़्रांस के राष्ट्रपति ने जेसीपीओए के संदर्भ में इससे अलग हटकर कुछ बातें कही हैं।  फ़्रांस का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि अमरीका के मुक़ाबले में यूरोप स्वतंत्र रूप से कुछ भी करने में सक्षम नहीं है।

जेसीपीओए से हटकर अमरीका और फ़्रांस की जो मांग है वह ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्र में उसकी उपस्थिति जैसे मुद्दों को परमाणु समझौते में शामिल करना है।  हालांकि इन दोनों मुद्दों का जेसीपीओए से कोई संबन्ध नहीं है।  इससे पता चलता है कि अमरीका और फ़्रांस का लक्ष्य, पश्चिमी एशिया में ईरान की प्रभावशाली शक्ति को सीमित करना है।  सामान्यतः संसार का कोई भी देश अपनी रक्षा शक्ति पर वार्ता नहीं करता।  इस संदर्भ में ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता पहले की कह चुके हैं कि देश की सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर वार्ता नहीं हो सकती।  वरिष्ठ नेता का यह दृष्टिकोण सिद्ध करता है कि ईरान, कभी भी देश की सुरक्षा जैसे अति संवेदनशील विषय पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है क्योंकि यह काम अपनी बात से पीछे हटने और सौदेबाज़ी के अर्थ में हैै।  परमाणु समझौते की सुरक्षा एसी स्थिति में ही हो सकती है कि जब यूरपीय पक्ष अपने वचनों का पूरी तरह से पालन करे।  इस स्थिति में ईरान, फ़्रांस या किसी अन्य यूरोपीय पक्ष की नई चाल से सुरक्षित रहेगा।




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